हरिद्वार में ‘न्याय संहिता’ प्रदर्शनी का सफल समापन, 10 हजार से अधिक लोगों ने लिया लाभ

हरिद्वार 11 मार्च 2026। 
बैरागी कैम्प, हरिद्वार में उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा आयोजित ‘न्याय संहिता’ विषयक जन-जागरूकता प्रदर्शनी का बुधवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। 7 मार्च से शुरू हुई इस प्रदर्शनी का उद्देश्य आमजन को नई न्याय संहिताओं के बारे में जागरूक करना और न्याय व्यवस्था में किए गए महत्वपूर्ण सुधारों की जानकारी समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना था।
यह प्रदर्शनी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की परिकल्पना और उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में आयोजित की गई। प्रदर्शनी के माध्यम से भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के प्रमुख प्रावधानों को सरल और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया।
प्रदर्शनी में थीम आधारित सूचना पैनल, डिजिटल डिस्प्ले, इन्फोग्राफिक्स, पोस्टर और ऑडियो-विजुअल माध्यमों के जरिए आगंतुकों को न्याय व्यवस्था में तकनीकी नवाचार, डिजिटल साक्ष्य की स्वीकार्यता, समयबद्ध जांच, पीड़ित अधिकारों की सुरक्षा और महिला-बाल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई। साथ ही पुलिस विवेचना में तकनीकी उपकरणों के उपयोग और साइबर अपराधों से निपटने के तरीकों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया।
प्रदर्शनी के दौरान विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राओं, युवाओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। आईटीबीपी, बीएसएफ, एनसीबी और एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों के साथ ही पीटीसी नरेंद्रनगर, एटीसी हरिद्वार और एसडीआरएफ के युवा आपदा मित्रों ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। वहीं शांतिकुंज और पीएमएस स्कूल के विद्यार्थियों सहित कई संस्थानों के छात्र-छात्राओं ने भी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
समापन दिवस पर एलबीएसएनएए के प्रशिक्षुओं, अभियोजन टीमों, विभिन्न जनपदों के विवेचना अधिकारियों तथा जवाहर नवोदय विद्यालय देहरादून, ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी, पीएमएस रोशनाबाद और आचार्य कुलम पतंजलि योगपीठ सहित कई शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
प्रदर्शनी में नुक्कड़ नाटक, संवादात्मक प्रस्तुतियां और जागरूकता सत्र भी आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से कानून से जुड़े जटिल विषयों को सरल तरीके से समझाया गया। इन कार्यक्रमों ने विशेष रूप से युवाओं में न्याय संहिताओं के प्रति रुचि और समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रदर्शनी के दौरान लगभग 10 हजार से अधिक आगंतुकों ने इसका अवलोकन किया और इसे ज्ञानवर्धक पहल बताया। कार्यक्रम के दौरान पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी प्रदर्शनी का निरीक्षण किया।
उत्तराखण्ड पुलिस के अनुसार इस प्रकार के जन-जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज में कानून के प्रति जागरूक, जिम्मेदार और सहभागी नागरिक समाज का निर्माण करना है।



