गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ तक रेल संपर्कता के विस्तार के लिए सर्वेक्षण कार्य पूरे किए गए- केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली 11 मार्च। केंद्रीय मंत्री श्री वैष्णव ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य में पूर्णतः/अंशत: आने वाली ₹40,384 करोड़ की लागत पर 216 कि.मी. कुल लंबाई को कवर करने वाली 03 नई रेल लाइनों को स्वीकृत किया गया है
– रेल, सूचना और प्रसारण एवं इलेक्ट्रोनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने सांसद श्री अजय भट्ट के द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल का दिया जवाब
बुधवार को लोकसभा में रेल, सूचना और प्रसारण एवं इलेक्ट्रोनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने सांसद श्री अजय भट्ट के सवाल रेल मंत्रालय को उत्तराखंड से प्राप्त प्रस्ताव उनकी स्वीकृति और लंबित प्रस्तावों का तत्संबंधी ब्यौरे पर जवाब दिया।
केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने जवाब दिया कि उत्तराखण्ड राज्य में पूर्णतः/अंशत: आने वाली अवसंरचनात्मक परियोजनाओं एवं संरक्षा कार्यों हेतु बजट आवंटन निम्नानुसार है। 2009–14 की अवधि में रेलवे परियोजनाओं पर औसत परिव्यय 187 करोड़ रुपये प्रति वर्ष था। इसके मुकाबले 2025–26 में यह परिव्यय बढ़कर 4,641 करोड़ रुपये हो गया है, जो पहले की तुलना में लगभग 25 गुना अधिक है।
01.04.2025 तक की स्थिति के अनुसार, उत्तराखण्ड राज्य में पूर्णतः/अंशत: आने वाली ₹40,384 करोड़ की लागत पर 216 कि.मी. कुल लंबाई को कवर करने वाली 03 नई रेल लाइनों को स्वीकृत किया गया है जिनमें से 16 कि.मी. लंबाई को कमीशन कर दिया गया है और मार्च, 2025 तक ₹19,898 करोड़ का व्यय उपगत किया गया है। इसका संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है। नई लाइन श्रेणी में कुल 03 परियोजनाएँ हैं। इन परियोजनाओं की कुल लंबाई 216 कि.मी. है, जिसमें से 16 कि.मी. लंबाई कमीशन की जा चुकी है। इन परियोजनाओं पर मार्च 2025 तक कुल 19,898 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है।
चारधाम को रेल संपर्कता मुहैया कराने के लिए ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई लाइन परियोजना (125 कि.मी.) स्वीकृत की गई है।
इस परियोजना का संरेखण उत्तराखंड के देहरादून, टेहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रूद्रप्रयाग और चमोली जिले से होकर गुजरता है और यह ऋषिकेष और भारत के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के साथ देवप्रयाग और कर्णप्रयाग के धार्मिक एवं पर्यटक स्थलों से रेल संपर्कता प्रदान करेगा।
परियोजना का संरेखण मुख्यतः सुरंगों से होकर गुजरता है। इस परियोजना में 104 कि.मी. लंबाई की 16 मुख्य लाइन सुरंगों और लगभग 98 कि.मी. लंबाई की 12 एस्केप सुरंगों का निर्माण शामिल हैं। अब तक 99 कि.मी. लंबाई की मुख्य सुरंगें तथा 94 कि.मी. से अधिक लंबाई की 09 एस्केप सुरंगें पूरी की जा चुकी हैं।
निर्माण कार्यो की प्रगति में वृद्धि करने के लिए विभिन्न सुरंगों में 08 एडिट्स की पहचान की गई है। इन एडिट्स के माध्यम से सुरंग उत्खनन के अतिरिक्त कार्य सृजित हुए, जिससे लंबी सुरंगों को शीघ्र पूरा करने में तेजी आई है। सभी 08 एडिट्स (5 कि.मी.) के कार्य भी पूरे कर लिए गए हैं।
इस परियोजना में 19 महत्वपूर्ण/बड़े पुलों का निर्माण भी शामिल है। 19 महत्वपूर्ण/बड़े पुलों में से 8 का निर्माण भी पूरा हो चुका है। शेष पुलों के निर्माण कार्य भी शुरू कर दिए गए हैं।
केंद्रीय मंत्री श्री वैष्णव ने कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ तक रेल संपर्कता के विस्तार करने के लिए सर्वेक्षण कार्य पूरे कर लिए गए हैं। बहरहाल, परियोजना का संरेखण हिमालय के मुख्य केंद्रीय थ्रस्ट के पास स्थित है जो अत्यधिक भूकंपीय रूप से सक्रिय है।


