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पूर्व सैनिक राष्ट्र निर्माण की जीवंत ऊर्जा हैं: राज्यपाल गुरमीत सिंह

राष्ट्रीय सैनिक संस्था के 18वें राष्ट्रीय अधिवेशन में राज्यपाल का संबोधन

लोक भवन देहरादून/नई दिल्ली 24 फरवरी,2026।उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने आज नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सैनिक संस्था के 18वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने संस्था के सदस्यों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया।
राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय सैनिक संस्था केवल पूर्व सैनिकों का मंच नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक जीवंत ऊर्जा है, जो अनुभव और युवा शक्ति को एक सूत्र में पिरोकर समाज को दिशा दे रही है।
राज्यपाल ने कहा कि सेवानिवृत्त सैनिक समाज की चलती-फिरती अकादमी के समान होते हैं। वर्दी उतरने के बाद भी सैनिक का उत्तरदायित्व समाप्त नहीं होता। उन्होंने पूर्व सैनिकों से शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास एवं युवा मार्गदर्शन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को एक अनुशासित और सजग नेटवर्क की आवश्यकता है, जिसमें राष्ट्रीय सैनिक संस्था की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि सेना में बिताया गया समय युवाओं को अनुशासन, आत्मविश्वास और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से ओतप्रोत करता है। राज्यपाल ने युवाओं से राष्ट्र रक्षा को अपना धर्म मानते हुए आगे आने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने सीमावर्ती क्षेत्रों के सशक्तीकरण को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘वाइब्रेंट विलेज’ परिकल्पना ने सीमा क्षेत्रों के गांवों को देश के “प्रथम गांव” के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि पलायन रोकना और सीमांत क्षेत्रों को सुदृढ़ बनाना एक रणनीतिक आवश्यकता है, जिसमें पूर्व सैनिकों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकता है।
राज्यपाल ने कहा कि आज का नया भारत आत्मविश्वास से परिपूर्ण है और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। एआई, ड्रोन और साइबर सुरक्षा जैसे आधुनिक आयामों के साथ भारत वैश्विक नेतृत्व के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रत्येक नागरिक को सैनिक की भांति अनुशासित, समर्पित और राष्ट्र प्रथम के भाव से कार्य करना होगा।

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