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“क्रीड़ा विश्वविद्यालय डिग्री नहीं, उत्कृष्ट खेल संस्कृति का केंद्र बने” — राज्यपाल

लोक भवन, देहरादून | 21 फरवरी, 2026
उत्तराखण्ड क्रीड़ा विश्वविद्यालय की प्रबन्ध परिषद की प्रथम बैठक आयोजित
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह की अध्यक्षता में लोक भवन में हुई बैठक

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को लोक भवन, देहरादून में उत्तराखण्ड क्रीड़ा विश्वविद्यालय की प्रबन्ध परिषद की प्रथम बैठक आयोजित की गई। बैठक में विश्वविद्यालय के कुलपति अमित कुमार सिन्हा ने विश्वविद्यालय की स्थापना, शैक्षणिक योजनाओं, प्रशासनिक ढांचे, मानव संसाधन, प्रस्तावित पाठ्यक्रमों तथा अवस्थापना विकास से संबंधित विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
बैठक में विश्वविद्यालय के शिक्षण एवं प्रशासनिक पदों के सृजन पर विचार-विमर्श किया गया तथा औचित्य सहित प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराए जाने पर सहमति व्यक्त की गई।
कुलपति ने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय की परिकल्पना वर्ष 2022 में की गई थी। इसका अधिनियम मार्च 2025 में पारित हुआ तथा 05 मई 2025 को राज्यपाल की स्वीकृति प्राप्त हुई। विश्वविद्यालय का मुख्यालय गौलापार, हल्द्वानी में स्थापित है, जिसे “मिशन ओलंपिक 2036” के लक्ष्य के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि क्रीड़ा विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने का संस्थान न होकर उत्कृष्ट खेल संस्कृति के निर्माण का सशक्त केंद्र बने। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और सही मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की है।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की कार्ययोजना को “ग्राम से ओलंपिक” की अवधारणा से जोड़ने पर जोर देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण और पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राज्य और देश का नाम रोशन कर सकें।
उन्होंने निर्देश दिए कि क्रीड़ा विश्वविद्यालय देश के अन्य खेल विश्वविद्यालयों एवं खेल संगठनों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) करे, जिससे प्रशिक्षण, शोध, तकनीक और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान संभव हो सके। साथ ही, राज्य के उन गांवों को चिन्हित करने के निर्देश दिए, जहां से विशिष्ट खेल प्रतिभाएं उभरकर सामने आई हैं, ताकि उन्हें खेल प्रतिभा विकास के विशेष केंद्रों के रूप में विकसित किया जा सके।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के सफल संचालन के लिए कुलपति की स्वायत्तता को आवश्यक बताते हुए कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ लिए गए निर्णय ही संस्थान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।
बैठक में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. आशीष चौहान, अपर सचिव मनुज गोयल, अपर सचिव नवनीत पाण्डे सहित प्रबन्ध परिषद के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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