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आरबीआई का अर्बन कोऑपरेटिव बैंक देहरादून पर बड़ा एक्शन, छह माह की पाबंदी

9000 खातों से निकासी पर रोक, नए ऋण और निवेश पूरी तरह बंद

देहरादून,17 फरवरी। अर्बन कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, देहरादून पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कड़ा शिकंजा कसते हुए छह माह का प्रतिबंध लगा दिया है। आरबीआई के आदेश के बाद बैंक के करीब 9000 खातों से धनराशि की निकासी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई बैंकिंग विनियमन अधिनियम के तहत जनहित और जमाकर्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की गई है।
आरबीआई के निर्देशों के अनुसार बैंक बिना पूर्व लिखित अनुमति के कोई नया ऋण या अग्रिम नहीं दे सकेगा और न ही पुराने ऋणों का नवीनीकरण किया जा सकेगा। इसके साथ ही निवेश, नई देनदारियां लेने, उधार लेने, नए जमा स्वीकार करने, भुगतान करने तथा किसी भी प्रकार की संपत्ति के हस्तांतरण या बिक्री पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। आरबीआई के इस कदम से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि बैंक के वित्तीय संचालन में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
केवल ऋण समायोजन की अनुमति
निर्देशों के तहत बचत, चालू, सावधि या आवर्ती जमा किसी भी खाते से नकद निकासी संभव नहीं होगी। हालांकि, यदि कोई खाताधारक स्वयं बैंक का उधारकर्ता या जमानतदार है, तो उसकी जमा राशि को संबंधित ऋण खाते में समायोजित करने की अनुमति दी गई है।
सीमित प्रशासनिक कामकाज रहेगा जारी
आरबीआई ने बैंक को कुछ आवश्यक प्रशासनिक कार्यों की अनुमति दी है। इनमें मियाद पूरी होने पर सावधि जमा का नवीनीकरण (उसी नाम और क्षमता में), कर्मचारियों का वेतन, किराया, कर, बिजली-पानी के बिल, स्टेशनरी, डाक खर्च, स्टांप/पंजीकरण शुल्क, न्यायालय शुल्क तथा वकीलों को सीमित शुल्क का भुगतान शामिल है। इसके अलावा डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईसीजीसी) को देय प्रीमियम का भुगतान भी किया जा सकेगा।
आरबीआई ने दैनिक प्रशासनिक खर्च पर भी सख्त सीमा तय की है। यह खर्च पिछले छह महीनों के औसत मासिक व्यय से अधिक नहीं होगा। यदि पूर्व में ऐसा कोई खर्च नहीं रहा हो, तो अधिकतम 1000 रुपये तक की अनुमति दी गई है।
आरबीआई के इस फैसले से बैंक के खाताधारकों में हलचल है, वहीं नियामक का कहना है कि यह कदम जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक

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