देहरादून में भव्य हिन्दू सम्मेलन संपन्न, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरण का संदेश
देहरादून,14 फरवरी। जीएमएस रोड स्थित चौधरी फार्म हाउस में आयोजित भव्य हिन्दू सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन में समाज के विभिन्न वर्गों, संत समाज, सामाजिक संगठनों एवं गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। आयोजन का उद्देश्य सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और संगठनात्मक एकता को सुदृढ़ करना रहा।
कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत सामाजिक समरसता संयोजक श्री राजेंद्र पंत ने किया। सम्मेलन के संयोजक क्रीड़ा भारती के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता जोगेंद्र पुंडीर रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर डॉ. रामेश्वर दास जी महाराज, संघ के विभाग प्रचारक श्री धनंजय जी तथा विशिष्ट अतिथि लेखिका एवं साहित्यकार भारती पाण्डे उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ परिंदा डांस एकेडमी के प्रतिभाशाली बच्चों द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना एवं शिव तांडव नृत्य से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
अपने संबोधन में जोगेंद्र पुंडीर ने कहा कि ऐसे हिन्दू सम्मेलन समाज को जागृत और संगठित करने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना पर आधारित है, जिसमें भेदभाव और छुआछूत का कोई स्थान नहीं है।
विशिष्ट अतिथि भारती पाण्डे ने सनातन धर्म में मातृशक्ति के सम्मान और महिलाओं की गरिमा पर प्रकाश डालते हुए इसे भारतीय संस्कृति की विशिष्ट पहचान बताया।
मुख्य वक्ता श्री धनंजय ने सनातन धर्म के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि सेवा भावना ही इसकी आत्मा है। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में चिकित्सा सेवा के लिए पद्मश्री से सम्मानित डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले के सेवा कार्यों को प्रेरणास्रोत बताया। साथ ही भगवान श्रीराम के आदर्शों और भारतीय पारिवारिक मूल्यों पर भी प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि डॉ. रामेश्वर दास जी महाराज ने वाल्मीकि रामायण के मंत्रों के उच्चारण के साथ अपने उद्बोधन की शुरुआत की। उन्होंने सनातन धर्म को विश्व का सबसे प्राचीन धर्म बताते हुए वैदिक मूल्यों की पुनर्स्थापना और सामाजिक समानता पर बल दिया।
सम्मेलन के अंत में समाज में विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले कर्मयोगियों—नाई, बढ़ई, पुताई कार्यकर्ता, मनिहारी, सफाई कर्मी सहित अन्य श्रमिक बंधुओं को सम्मानित किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और जलपान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
यह हिन्दू सम्मेलन सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरण और संगठनात्मक एकता का प्रभावशाली उदाहरण बनकर उभरा।