एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी में एचआर कॉन्क्लेव 2026 का सफल आयोजन
“नई पीढ़ी को हुनरमंद बनाना: उम्मीदें बनाम सच्चाई” पर हुआ राष्ट्रीय मंथन
देहरादून, 12 फरवरी 2026।
एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (एमआईटी-डब्ल्यूपीयू) में आयोजित एचआर कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन अत्यंत सफल रहा। उद्योग और शिक्षा जगत के बीच राष्ट्रीय स्तर के इस संवाद का उद्देश्य छात्रों को तेजी से बदलते कार्य परिवेश के अनुरूप तैयार करना रहा, ताकि वे उद्योग की अपेक्षाओं पर खरे उतर सकें। कॉन्क्लेव का मुख्य विषय “नई पीढ़ी को हुनरमंद बनाना: उम्मीदें बनाम सच्चाई” रहा।
सम्मेलन में देश-विदेश के नामी एचआर लीडर्स, उद्योग विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने भाग लिया और ग्रेजुएट छात्रों की एम्प्लॉयबिलिटी (नौकरी पाने की क्षमता) और वर्क रेडीनेस (काम के लिए तैयार होने) के बीच बढ़ते अंतर पर गहन चर्चा की। पैनल चर्चाओं में विशेष रूप से दो अहम विषयों पर फोकस किया गया—
“प्लग-एंड-प्ले या ट्रेन-एंड-ट्रांसफॉर्म? नई पीढ़ी की प्रतिभा पर एचआर का नजरिया” तथा
“एम्प्लॉयबिलिटी बनाम वर्क रेडीनेस: शिक्षा कहां खत्म होती है और उद्योग कहां से शुरू होता है।”
इस कॉन्क्लेव में इन्फोसिस बीपीएम, नोवार्टिस, कल्याणी ग्रुप, एसकेएफ इंडिया, यूनाइटेड एयरलाइंस, विप्रो इंजीनियरिंग, मेट्रो ग्लोबल सॉल्यूशंस, बीएनवाई मेलॉन, सर्से, पीडब्ल्यूसी और इनोमैटिक्स रिसर्च लैब्स जैसे प्रतिष्ठित संगठनों के एचआर लीडर्स ने अपने अनुभव साझा किए।
एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर डॉ. आर. एम. चिटनिस ने कहा कि एचआर प्रोफेशनल्स कर्मचारियों की तरक्की और खुशहाली का ध्यान रखते हैं, लेकिन आत्म-देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि समग्र विकास—जिसमें शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक सुकून, मजबूत रिश्ते और आर्थिक सुरक्षा शामिल हों—ही सच्ची सफलता की कुंजी है। खुश और संतुष्ट कर्मचारी ही संगठनों को अधिक मानवीय, मजबूत और उत्पादक बनाते हैं।
नोवार्टिस के एडी एचआर श्री विक्रम कुलकर्णी ने कहा कि “तेज़ भागने के लिए कभी-कभी रुकना ज़रूरी होता है।” उन्होंने कार्यस्थल पर संतुलन, मानसिक सुकून और नेतृत्व की भूमिका पर ज़ोर देते हुए कहा कि लीडर्स जैसा व्यवहार करते हैं, संगठन की संस्कृति भी वैसी ही बनती है।
एसकेएफ इंडिया लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट (एचआर) श्री जैकब वर्गीस ने कर्मचारियों की मानसिक सेहत को संगठन की दीर्घकालिक सफलता के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि काउंसलिंग, ट्रेनिंग और सहयोगी नीतियों के साथ-साथ कर्मचारियों को भी अपनी सीमाएं तय करना और आत्म-जागरूक रहना चाहिए।
मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड (रिलायंस ग्रुप) के एल एंड डी हेड श्री निखिल भोजवानी ने कामकाजी माता-पिता के लिए सहयोगी नीतियों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब संगठन कर्मचारियों के पारिवारिक दायित्वों को समझते हैं, तो कर्मचारी संगठन से लंबे समय तक जुड़े रहते हैं।
कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में बदलते भर्ती ट्रेंड्स, एआई आधारित कार्यस्थल और कैंपस रिक्रूटमेंट की नई अपेक्षाओं पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया कि इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट्स, अप्रेंटिसशिप और उद्योग विशेषज्ञों से मार्गदर्शन शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटने में अहम भूमिका निभाते हैं।
कॉन्क्लेव का समापन इस साझा सहमति के साथ हुआ कि उद्योग और अकादमिक जगत मिलकर ऐसी मजबूत व्यवस्था तैयार करेंगे, जिससे छात्र केवल डिग्रीधारी ही नहीं, बल्कि नौकरी के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार प्रोफेशनल्स बन सकें।


