निर्माणाधीन रेलवे स्टेशनों के आसपास होगा समग्र पुनर्विकास, एस्केप टनलों को पैरेलल रोड के रूप में विकसित करने के निर्देश
देहरादून 11 फरवरी।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान राज्य में निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित रेल परियोजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित रेल परियोजनाओं में टनलों के साथ बनने वाली एस्केप टनलों को भविष्य में समानांतर सड़कों (पैरेलल रोड्स) के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस व्यवस्था की जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत बनी एस्केप टनलों के भविष्य में संभावित उपयोग को लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। इसके साथ ही कर्णप्रयाग से बागेश्वर तक रेल लाइन के विस्तार की संभावना पर भी गंभीरता से कार्य किया जाए।
टनकपुर–बागेश्वर रेल लाइन को मिले गति, राष्ट्रीय परियोजना घोषित कराने का प्रयास
मुख्यमंत्री ने टनकपुर–बागेश्वर रेल लाइन परियोजना पर तेजी से कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि इस परियोजना के अंतर्गत विभिन्न वैकल्पिक मार्गों पर भी विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक क्षेत्र एवं जनता को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अल्मोड़ा एवं सोमेश्वर क्षेत्र को भी इस रेल परियोजना से जोड़ने की संभावनाओं पर कार्य किया जाए।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से टनकपुर–बागेश्वर रेल लाइन परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किए जाने का आग्रह करने के निर्देश भी दिए, जिससे इसके निर्माण कार्य को गति मिल सके।
रेलवे स्टेशनों के आसपास विकसित होंगे बाजार और स्वरोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकेश–कर्णप्रयाग परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित रेलवे स्टेशनों के लिए एकीकृत (इंटीग्रेटेड) विकास योजना बनाई जाए, ताकि स्टेशनों के आसपास स्थानीय लोगों के लिए बाजार विकसित हो सकें।
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी निर्माणाधीन रेलवे स्टेशनों में स्वयं सहायता समूहों एवं राज्य के स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। साथ ही प्रस्तावित रेलवे स्टेशनों के आसपास के क्षेत्रों में लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाए तथा होमस्टे एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति जन जागरूकता बढ़ाई जाए।
पर्यटन, धार्मिक स्थलों और गांवों के विकास का बनेगा रोडमैप
मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माणाधीन रेलवे स्टेशनों के आसपास स्थित गांवों, कस्बों, धार्मिक स्थलों एवं पर्यटन स्थलों के विकास के लिए भी रोडमैप तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशनों के आसपास के क्षेत्रों का समुचित पुनर्विकास किया जाए, ताकि रेल परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद उत्तराखंड आने वाले यात्रियों को बेहतर आवागमन सुविधा मिल सके।
ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना की प्रगति
बैठक में बताया गया कि ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना का 72.5 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि टनल निर्माण का 95.30 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। इस परियोजना के अंतर्गत कुल 28 टनलों का निर्माण किया गया है, जिनमें 16 मुख्य टनल एवं 12 एस्केप टनल शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त परियोजना के अंतर्गत विभिन्न रेलवे स्टेशनों का निर्माण अलग-अलग थीम पर किया जा रहा है। इनमें शिवपुरी स्टेशन को नीलकंठ महादेव, ब्यासी को महर्षि वेदव्यास, देवप्रयाग को समुद्र मंथन, जनासु को उत्तराखंड संस्कृति, मलेथा को वीर माधो सिंह भंडारी, श्रीनगर को मां राजराजेश्वरी देवी, धारी देवी को मां धारी देवी, तिलनी को केदारनाथ, घोलतीर को पांच महादेव, गौचर को बाल गोविंद कृष्ण तथा कर्णप्रयाग स्टेशन को बद्रीनाथ मंदिर एवं राधा-कृष्ण थीम पर आधारित विकसित किया जा रहा है।
टनकपुर–बागेश्वर रेल लाइन पर तीन सर्वे विकल्प
टनकपुर–बागेश्वर रेल लाइन परियोजना के संबंध में बैठक में बताया गया कि रेलवे द्वारा तीन सर्वेक्षण विकल्प प्रस्तावित किए गए हैं। इसके साथ ही अन्य वैकल्पिक मार्गों तथा अल्मोड़ा एवं सोमेश्वर क्षेत्र को जोड़ने की योजना पर भी कार्य किया जा रहा है।
बैठक में मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री ब्रजेश कुमार संत, श्री पंकज पांडे सहित मुख्य परियोजना प्रबंधक श्री हिमांशु बडोनी, श्री विजय, श्री ओम प्रकाश, श्री सुमन सिंह, श्री कल्याण सिंह भंडारी, श्री सनत कुमार सिंह एवं वर्चुअल माध्यम से रेलवे के अधिकारी उपस्थित रहे।