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आईजीआई ने उन्नत रंगीन रत्न विश्लेषण तकनीक से सुसज्जित अपनी दूसरी प्रयोगशाला का किया उद्घाटन

देहरादून 02 फरवरी, 2026 ।

इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टिट्यूट (IGI), जो हीरे, रंगीन रत्नों एवं आभूषणों के प्रमाणन के क्षेत्र में एक वैश्विक और विश्वसनीय संस्था है, ने जयपुर के सीतापुरा क्षेत्र में अपनी दूसरी अत्याधुनिक प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। इस नई सुविधा के साथ उत्तर भारत में आईजीआई की मौजूदगी और अधिक सशक्त हो गई है।
रंगीन रत्नों के व्यापार, बिना कटे पोल्की और उत्कृष्ट आभूषण कारीगरी की ऐतिहासिक परंपरा के कारण जयपुर आईजीआई के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। सीतापुरा, जो रत्न एवं आभूषण निर्माण का प्रमुख हब है, में प्रयोगशाला की स्थापना से उद्योग के निकट रहते हुए निर्माताओं, निर्यातकों और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। यह पहल पारदर्शिता, विश्वसनीयता और उपभोक्ता विश्वास को और मजबूत करेगी।
इस अवसर पर आईजीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं ग्लोबल चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर श्री तेहमास्प प्रिंटर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर उपभोक्ताओं की पसंद में बदलाव के साथ रंगीन रत्नों की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। फ्यूज़न डिज़ाइनों, पर्सनलाइज़्ड ज्वेलरी और रंगीन रत्नों की दुर्लभता व सौंदर्य के प्रति बढ़ता आकर्षण इस मांग के प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने बताया कि रंगीन रत्नों की उत्पत्ति का निर्धारण और उनमें किए गए ट्रीटमेंट की पहचान अत्यंत विशेषज्ञता और उन्नत तकनीक की मांग करती है। जयपुर की नई प्रयोगशाला में रमन स्पेक्ट्रोमेट्री, यूवी-विज़-एनआईआर स्पेक्ट्रोस्कोपी और एक्स-रे फ्लोरेसेंस जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से रत्नों की आंतरिक संरचना, संघटन और भूवैज्ञानिक इतिहास का सटीक विश्लेषण किया जाएगा।
जयपुर स्थित यह प्रयोगशाला हीरे, रंगीन रत्नों और आभूषणों के लिए आईजीआई की प्रमाणन सेवाओं की पूरी श्रृंखला प्रदान करेगी। साथ ही, सीतापुरा कार्यालय के माध्यम से क्षेत्रीय कौशल विकास को बढ़ावा देने हेतु आईजीआई स्कूल ऑफ जेमोलॉजी के अंतर्गत विश्व-स्तरीय शैक्षणिक कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि इस नई शुरुआत के साथ आईजीआई अब 10 देशों में 35 प्रयोगशालाएं और 21 स्कूल ऑफ जेमोलॉजी का संचालन कर रहा है।

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