आईआईटी रुड़की की ऐतिहासिक उपलब्धि: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिज़ाइन के संगम से भविष्य के फैशन को नई दिशा
● नया “फ्लोरा (FLORA)” डेटासेट और “नेरा (NeRA)” अडैप्टर पाठ्य विवरण से विस्तृत फैशन स्केच तैयार करने में एआई की सहायता करता है, जो मेक इन इंडिया और हरित प्रौद्योगिकी को समर्थन देता है
● भारत का पहला फैशन-स्केच डेटासेट डिज़ाइन, खुदरा और सततता के क्षेत्र में नए अवसर खोलता है
रुड़की 30 जनवरी ।
आईआईटी रुड़की ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रचनात्मक डिज़ाइन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। संस्थान द्वारा विकसित फ्लोरा (FLORA) डेटासेट और नेरा (NeRA) अडैप्टर दो ऐसी अभिनव तकनीकें हैं, जो एआई द्वारा फैशन को समझने, व्याख्या करने और सृजन करने के तरीके को एक नया आयाम देती हैं।
“ड्रेसिंग द इमैजिनेशन: एआई-संचालित पाठ से फैशन परिधानों में रूपांतरण हेतु एक डेटासेट तथा उन्नत फीचर अनुकूलन के लिए एक नवीन नेरा अडैप्टर” शीर्षक से प्रकाशित यह अध्ययन भारत का पहला ऐसा ढांचा प्रस्तुत करता है, जो एआई मॉडलों को पाठ्य विवरणों से उच्च-गुणवत्ता और विस्तृत फैशन स्केच तैयार करने में सक्षम बनाता है।
फैशन कल्पनाशीलता पर आधारित होता है, लेकिन डिज़ाइनरों को रचनात्मक विचारों और अवधारणाओं को स्केच में बदलने में पर्याप्त समय लगाना पड़ता है। साथ ही, फैशन डिज़ाइनरों को नवीनतम रुझानों के अनुरूप वैयक्तिकृत परिधान डिज़ाइन भी प्रस्तुत करने होते हैं। पहले ग्राहक “नीली शर्ट” जैसे साधारण शब्दों के माध्यम से परिधान खोजते थे, जबकि आज के ग्राहक और डिज़ाइनर “मिनिमलिस्ट, क्रॉप्ड रेयॉन ब्लाउज़, जिसमें मैंडरिन कॉलर और रैगलन स्लीव्स हों” जैसी जटिल और पेशेवर शब्दावली का उपयोग करते हैं। वर्तमान में उपलब्ध कई एआई उपकरण इस प्रकार की पेशेवर फैशन भाषा को समझने में सक्षम नहीं हैं। यह शोध इसी चुनौती का समाधान प्रस्तुत करता है, जिससे एआई को विस्तृत परिधान शब्दावली समझने और उसे फैशन स्केच में रूपांतरित करने का प्रशिक्षण मिलता है।
यह शोध आईआईटी रुड़की के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग तथा मेहता फैमिली स्कूल ऑफ डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संयुक्त संकाय सदस्य प्रो. स्पर्श मित्तल के नेतृत्व में किया गया है। यह पहल भारत के फैशन उद्योग में एआई-संचालित, सटीक और अभिव्यक्तिपूर्ण डिज़ाइन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
वर्तमान में उपलब्ध अधिकांश फैशन डेटासेट फोटोग्राफ या कैटलॉग छवियों पर आधारित होते हैं। ये ऑनलाइन खरीदारी मंचों के लिए उपयोगी हैं, किंतु वे उन स्केचों को प्रतिबिंबित नहीं करते, जिन्हें डिज़ाइनर सामान्यतः अपनी स्केचबुक में बनाते हैं। फ्लोरा इस दृष्टि से विशिष्ट है, क्योंकि इसमें पेशेवर फैशन स्केच और उनके पाठ्य विवरणों की युग्मित प्रविष्टियाँ सम्मिलित हैं, जिनमें सिलुएट, सामग्री, बनावट और समग्र शैली जैसी तकनीकी शब्दावली का उपयोग किया गया है। जब किसी एआई मॉडल को फ्लोरा डेटासेट पर प्रशिक्षित किया जाता है, तो वह विस्तृत शब्दों और उनके अनुरूप दृश्य विशेषताओं के बीच संबंध स्थापित करना सीखता है। परिणामस्वरूप, यह एआई मॉडल केवल “नीली ड्रेस” जैसे सरल विवरण ही नहीं, बल्कि “कोबाल्ट नीले रंग का सायंकालीन गाउन, जिसमें मुलायम ड्रेप्ड काउल नेकलाइन और रूच्ड बॉडिस हो” जैसे जटिल विवरणों को भी समझ सकता है।
फ्लोरा के साथ-साथ नेरा (नॉनलिनियर एक्सप्रेसिव रिप्रेज़ेंटेशन अडैप्टर) एक नई विधि है, जो एआई मॉडलों को इन डिज़ाइन संबंधों को अधिक तेज़ी और सटीकता से सीखने में सहायता करती है। फ्लोरा और नेरा को ओपन-सोर्स रूप में जारी किया जाना वैश्विक स्तर पर शोधकर्ताओं और डिज़ाइनरों को कला, प्रौद्योगिकी और सततता के संगम पर सहयोग और नवाचार के लिए सशक्त बनाएगा।
इस शोध के प्रमुख शोधकर्ता प्रो. स्पर्श मित्तल ने कहा, “हमारा कार्य एआई और डिज़ाइन को एक साथ लाकर रचनात्मकता को सरल, तेज़ और अधिक सतत बनाता है। आधुनिक फैशन में अनेक सूक्ष्म विवरण होते हैं, जिन्हें पहले एआई मॉडल ठीक से नहीं समझ पाते थे। फ्लोरा और नेरा के माध्यम से हम एआई को विस्तृत स्केच और सटीक डिज़ाइन शब्दावली के ज़रिये डिज़ाइनर की कल्पनाओं को समझने में सक्षम बनाते हैं। इससे फैशन, खुदरा और अन्य क्षेत्रों में नवाचार की गति तेज़ होगी। यह शोध आत्मनिर्भर और डिजिटल रूप से सशक्त भारत की परिकल्पना को समर्थन देता है।”
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने टीम को बधाई देते हुए कहा, “यह उल्लेखनीय उपलब्धि आईआईटी रुड़की की अत्याधुनिक अंतर्विषयक अनुसंधान के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। फ्लोरा और नेरा जैसी नवाचारात्मक पहलें यह प्रदर्शित करती हैं कि एआई का उपयोग भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और डिज़ाइन व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व को सुदृढ़ करने के लिए कैसे किया जा सकता है।
यह नवाचार डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और राष्ट्रीय एआई मिशन सहित भारत के प्रमुख राष्ट्रीय अभियानों को प्रत्यक्ष रूप से समर्थन देता है, क्योंकि यह रचनात्मक उद्योगों को सशक्त बनाने वाली स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देता है और सतत डिज़ाइन समाधानों को प्रोत्साहित करता है। फैशन डिज़ाइन में एआई के एकीकरण से डिज़ाइन चक्र छोटा होता है और फैशन डिज़ाइन का लोकतंत्रीकरण संभव होता है, जिससे भारत के तेज़ी से बढ़ते फैशन और वस्त्र क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नवाचार के अवसर सृजित होते हैं। यह ग्राहकों को अत्यंत विशिष्ट शब्दावली के माध्यम से व्यक्तिगत उत्पाद खोजने या आभासी परिधान परीक्षण का अनुभव लेने में सक्षम बनाकर व्यक्तिगत खरीदारी के नए आयाम खोलता है। यह शोध व्यक्तिगत फैशन डिज़ाइन, आभासी खुदरा, गेमिंग, मेटावर्स अनुप्रयोगों और सतत विनिर्माण सहित अनेक उद्योगों में परिवर्तनकारी प्रभाव डालने की क्षमता रखता है।”
यह अध्ययन संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों—एसडीजी 9 (उद्योग, नवाचार और अवसंरचना) तथा एसडीजी 12 (जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन)—के अनुरूप एआई-आधारित नवाचार में भारत के नेतृत्व को भी सुदृढ़ करता है। यह दर्शाता है कि आईआईटी रुड़की ऐसी एआई प्रौद्योगिकियों के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, जो तकनीकी रूप से उत्कृष्ट होने के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय रूप से भी उत्तरदायी हैं।
इस शोध पत्र के सह-लेखक गायत्री देशमुख (स्वतंत्र शोधकर्ता), सोमसुभ्र दे (आईआईटी मद्रास), चिराग सहगल (दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय), जिशु सेन गुप्ता (आईआईटी बीएचयू) तथा प्रो. स्पर्श मित्तल (आईआईटी रुड़की) हैं। यह नवाचार आईआईटी रुड़की को जेनरेटिव एआई अनुसंधान के क्षेत्र में एक अग्रणी संस्थान के रूप में स्थापित करता है, जहाँ प्रौद्योगिकी कल्पनाशीलता, सततता और डिज़ाइन के भविष्य की सेवा करती है।