उत्तराखण्डराज्य

राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान डॉ. नरेश बंसल ने उत्तराखंड में ग्रामीण पर्यटन और यमुना घाट के विकास का मुद्दा उठाया

नई दिल्ली 29 जनवरी । राज्यसभा सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष डा. नरेश बंसल ने आज सदन में शून्य काल के दौरान देवभूमि उत्तराखण्ड में ग्रामीण पर्यटन के विकास, यमुना नदी पर घाटों के निर्माण, स्नान व्यवस्था एवं नित्य आरती की समुचित व्यवस्था किए जाने की पुरजोर मांग उठाई।
डा. बंसल ने सदन के माध्यम से केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि विश्व प्रसिद्ध चारधाम के अतिरिक्त उत्तराखण्ड में अनेक ऐसे पुरातन धार्मिक स्थल, मंदिर श्रृंखलाएं और ऐतिहासिक धरोहरें हैं, जिन्हें पर्यटन के नक्शे पर और अधिक प्रभावी ढंग से उभारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण पर्यटन प्रकृति आधारित पर्यटन का एक महत्वपूर्ण स्वरूप है, जो देश-विदेश के प्रकृति प्रेमी पर्यटकों को आकर्षित करता है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड एक पौराणिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण राज्य है, जहां गंगा, यमुना, सरस्वती, सरयू जैसी पवित्र नदियां प्रवाहित होती हैं। यह क्षेत्र शांत वातावरण में विश्राम, ट्रैकिंग, कैंपिंग, जल क्रीड़ा एवं समृद्ध जैव-विविधता के अनुभव के लिए आदर्श है।
डा. बंसल ने कहा कि उत्तराखण्ड में लाखामंडल, पाताल भुवनेश्वर, प्राचीन गुफाएं, शहीद स्मारक एवं ऐतिहासिक स्थल राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। इसके साथ ही हनोल, धारी देवी सहित अनेक प्राचीन मंदिर लगभग हर गांव और शहर में विद्यमान हैं, जो धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाओं को दर्शाते हैं।
उन्होंने सदन में यह भी कहा कि जहां माता गंगा से जुड़े धार्मिक कार्य अधिकांश स्थानों पर संतोषजनक हैं, वहीं यमुना नदी के तटों पर घाट निर्माण, स्नान व्यवस्था और नित्य आरती की ठोस व्यवस्था अब भी अपेक्षित है। यमुना क्षेत्र में आयोजित होने वाले अनेक पौराणिक मेले और महोत्सव वर्षों से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं।
डा. नरेश बंसल ने कहा कि उत्तराखण्ड में कई पहचाने गए लेकिन अविकसित गांव हैं, जिन्हें विकसित कर ग्रामीण पर्यटन का मॉडल बनाया जा सकता है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती, रोजगार के अवसर और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी। आने वाले समय में ग्रामीण पर्यटन देवभूमि उत्तराखण्ड के समग्र विकास का एक सशक्त माध्यम बन सकता है।
अंत में उन्होंने सदन के माध्यम से केंद्र सरकार एवं माननीय पर्यटन मंत्री से आग्रह किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष स्नेह से जुड़े उत्तराखण्ड के सम्पूर्ण पर्यटन विकास, विशेष रूप से ग्रामीण पर्यटन, यमुना घाट निर्माण एवं पौराणिक मंदिर सर्किट पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उचित योजनाएं एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन से उत्तराखण्ड की पर्यटन क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

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