उत्तराखण्डराज्य

383 शिविर, 3 लाख से अधिक नागरिकों की भागीदारी, 21 हजार शिकायतों का निस्तारण

"जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” बना सुशासन का मॉडल

देहरादून 17 जनवरी 2026। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम उत्तराखंड में संवेदनशील, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी शासन का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। 17 जनवरी 2026 तक प्राप्त आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि सरकार न केवल जनता की समस्याएं सुन रही है, बल्कि उनका समयबद्ध समाधान भी सुनिश्चित कर रही है।
प्रदेश के सभी 13 जनपदों में अब तक इस अभियान के अंतर्गत कुल 383 शिविरों का आयोजन किया जा चुका है। आज के दिन 18 शिविर आयोजित हुए, जबकि अब तक 381 शिविरों के माध्यम से आम नागरिकों को सीधे लाभ पहुंचाया गया। इन शिविरों में कुल 3,07,705 नागरिकों ने प्रतिभाग किया, जिनमें आज 19,875 लोग शामिल रहे। यह व्यापक जन सहभागिता मुख्यमंत्री धामी की जन-केंद्रित शासन प्रणाली में जनता के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
31 हजार से अधिक शिकायतें, 21 हजार का समाधान
इन शिविरों के माध्यम से सरकार को अब तक 31,288 शिकायत प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 21,047 शिकायतों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। यह सरकार की त्वरित और प्रभावी कार्यप्रणाली को दर्शाता है।
42 हजार से अधिक प्रमाण पत्र जारी
कार्यक्रम के तहत अब तक 42,116 प्रमाण पत्र नागरिकों को जारी किए गए हैं। इनमें आज 2,417 प्रमाण पत्र निर्गत किए गए। जाति, निवास, आय सहित अन्य आवश्यक प्रमाण पत्रों की घर-घर उपलब्धता से आम जनता को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर से राहत मिली है।
1.67 लाख से अधिक लाभार्थी
राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से अब तक 1,67,940 से अधिक नागरिकों को लाभान्वित किया गया है, जिनमें आज 9,701 लाभार्थी शामिल हैं।
हर जिले में प्रभावी संचालन
जनपदवार आंकड़ों से स्पष्ट है कि अल्मोड़ा, हरिद्वार, देहरादून, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल, टिहरी, पौड़ी, पिथौरागढ़, चंपावत, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और उत्तरकाशी सहित सभी जिलों में यह अभियान प्रभावी रूप से संचालित हुआ। विशेष रूप से हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, देहरादून और अल्मोड़ा जिलों में कार्यक्रम का व्यापक प्रभाव देखने को मिला।
सरकार और जनता के बीच मजबूत सेतु
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह अभियान केवल शिकायत निस्तारण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सरकार और जनता के बीच भरोसे, पारदर्शिता और संवाद का मजबूत सेतु बन गया है।
कुल मिलाकर, “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम मुख्यमंत्री धामी की उपलब्धियों में एक ऐतिहासिक अध्याय के रूप में दर्ज हो चुका है, जिसने उत्तराखंड को संवेदनशील, सक्रिय और जन-विश्वास से परिपूर्ण शासन मॉडल के रूप में देश के सामने प्रस्तुत किया है।

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