उत्तराखण्डधर्म-कर्म

तुलसी मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर भक्ति व ज्ञान की रसधारा

देहरादून 06 जनवरी। भक्त भगवान को हर रूप में स्वीकार करते हैं—यह संदेश तुलसी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। कथा के दौरान महाभारत से जुड़े अनेक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिनमें द्रौपदी–अश्वत्थामा संवाद, सुकदेव जी का जन्म, कलियुग का वर्णन, गौ–वृषभ संवाद तथा राजा परीक्षित के गंगा तट पर जाने का प्रसंग प्रमुख रहा।
व्यास पीठ से कथा का रसपान कराते हुए व्यास श्री सुभाष जोशी जी ने भक्तों को उपदेश दिया कि जीवन में कभी भी ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए तथा विश्व की माता गौ माता की सेवा को अपने जीवन का अंग बनाना चाहिए। उन्होंने संकष्टी चतुर्थी व्रत के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
कथा के अवसर पर देहरादून के प्रसिद्ध डाट काली मंदिर से पधारे महंत जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के कई वरिष्ठ सदस्य, शिवसेना के प्रदेश प्रमुख गौरव कुमार तथा पृथ्वीनाथ मंदिर सेवा दल के सदस्य

उपस्थित रहे। सभी विशिष्ट अतिथियों को व्यास पीठ से स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
आयोजन समिति के अध्यक्ष रोशन राणा ने बताया कि संकष्टी चतुर्थी व्रत को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रसाद का निर्माण कर भक्तों में वितरण किया गया। कथा श्रवण के लिए विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों के साथ-साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
इस अवसर पर संरक्षक सुधीर जैन, अश्वनी अग्रवाल, आलोक जैन, अनिरुद्ध जिंदल, रोशन राणा, बालकृष्ण, संजीव गुप्ता, विनय प्रजापति, गौरव जैन, सुमित बंसल, हेमराज अरोड़ा, अरिहंत जैन, राहुल माटा, आयुष जैन, डॉ. नितिन अग्रवाल, शिवम गुप्ता, अनुष्का राणा, कृतिका राणा, हिमांशु, विक्रम चौधरी सहित अनेक श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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