उत्तराखण्डधरना प्रदर्शन

एंजेल चकमा को न्याय दिलाने के लिए एनएसयूआई का कैंडल मार्च, डीएवी पीजी कॉलेज से सर्वे चौक तक निकाली शांति यात्रा

देहरादून 03 जनवरी 2026। एंजेल चकमा को न्याय दिलाने की मांग को लेकर डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल के नेतृत्व में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं द्वारा शनिवार शाम डीएवी पीजी कॉलेज से सर्वे चौक तक कैंडल मार्च का आयोजन किया गया। कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और न्याय की मांग उठाई।
इस अवसर पर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत कोई “दूर का कोना” नहीं बल्कि भारत की धड़कन है। वहां के लोग अलग नहीं, बल्कि हम ही हैं—हमारे अपने हैं। उनकी सुरक्षा, गरिमा और बराबरी कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक अधिकार और हमारा कर्तव्य है।
उन्होंने तीन अहम बिंदुओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि
पहला—एंजेल चकमा को त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी न्याय मिलना चाहिए।
दूसरा—देहरादून हो या देश का कोई भी शहर, छात्रों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
तीसरा—“चिंकी”, “चीनी” या “बाहरी” जैसे शब्द मज़ाक नहीं हैं, बल्कि यह इंसान की गरिमा पर हमला हैं और इसी सोच से हिंसा को बढ़ावा मिलता है।
सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि भले ही मोमबत्ती की लौ छोटी प्रतीत हो, लेकिन अंधेरे को चुनौती देने के लिए एक लौ ही काफी होती है। उन्होंने संकल्प लिया कि एनएसयूआई किसी भी छात्र के साथ भेदभाव नहीं होने देगी, चाहे वह पूर्वोत्तर से हो, कश्मीर से हो, बिहार से हो या केरल से। कैंपस में सम्मान और अपनत्व की संस्कृति विकसित की जाएगी, जहां किसी की शक्ल, बोली, भोजन या पहनावे पर तंज नहीं, बल्कि सम्मान होगा।
उन्होंने कहा कि संगठन लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से न्याय की मांग तब तक उठाता रहेगा, जब तक एंजेल चकमा को न्याय नहीं मिल जाता। यह कैंडल मार्च केवल शोक व्यक्त करने का नहीं, बल्कि एक सशक्त संदेश है कि भारत में हर भारतीय सुरक्षित है, बराबर है और सम्मान का अधिकारी है।
कैंडल मार्च में नितिन नेगी, मुकेश बसेरा, उत्कर्ष जैन, सौरभ सेमवाल, कबीर मलिक, मयंक रावत, दक्ष रावत, स्वयं रावत, अभिनव क़फलिया, विदित डोभाल, यश नेगी, वत्सल, अभिषेक कुमार, मंथन सहित अनेक एनएसयूआई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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