उत्तराखण्डसहित्य

हरिद्वार में सम्पन्न हुआ युगधारा फाउंडेशन का दो दिवसीय आठवाँ वार्षिकोत्सव

हरिद्वार दिसम्बर।

युगधारा फाउंडेशन, लखनऊ तथा मुक्तक लोक सम्पूर्ण हिन्दी साहित्यांगन, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय आठवाँ वार्षिकोत्सव 27–28 दिसंबर 2025 को हरिद्वार, उत्तराखण्ड में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारम्भ उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति एवं हिन्दी–संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान डॉ. दिनेशचंद्र शास्त्री ने दीप प्रज्वलन कर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता देहरादून हिन्दी साहित्य समिति के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) राम विनय सिंह ने की। मंच पर संस्था की अध्यक्ष श्रीमती गीता अवस्थी सहित डॉ. कृपाशंकर मिश्र (मुंबई), डॉ. ऋतुध्वज सिंह (हरिद्वार), श्री अश्विनी कुमार (पंचकुला), श्री सुशील कुमार झा (हरिद्वार), डॉ. शिवमोहन सिंह (देहरादून) एवं डॉ. रामकृष्ण वी. सहस्रबुद्धे (नागपुर) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ हुआ। सरस्वती वंदना डॉ. मृदुल तिवारी ‘महक’ (मुंबई) ने प्रस्तुत की। युगधारा फाउंडेशन की महासचिव सुश्री सौम्या मिश्रा ‘अनुश्री’ ने स्वागत उद्बोधन देते हुए संस्था का परिचय एवं आयोजन की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की।
प्रथम सत्र में विद्वान वक्ताओं ने साहित्य के विविध आयामों पर सारगर्भित विचार रखे। डॉ. कृपाशंकर मिश्र ने “हिन्दी साहित्य में नवांकुरों की भूमिका”, डॉ. रामकृष्ण वी. सहस्रबुद्धे ने “साहित्य : आत्मबोध से विश्वबोध तक”, डॉ. शिवमोहन सिंह ने “समकालीन साहित्य और रचनाकारों की भूमिका” तथा डॉ. ऋतुध्वज सिंह ने “साहित्य में सांस्कृतिक विमर्श” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
मुख्य अतिथि डॉ. दिनेशचंद्र शास्त्री एवं अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) राम विनय सिंह ने अपने सारगर्भित उद्बोधनों से हिन्दी साहित्य, समाज एवं संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए युगधारा फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना की।
पुस्तक लोकार्पण सत्र में 14 कृतियों का विमोचन
तृतीय सत्र पुस्तक विमोचन एवं चर्चा का रहा, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में हरिद्वार के मुख्य विकास अधिकारी एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. ललित नारायण मिश्र (IAS) उपस्थित रहे। इस अवसर पर कुल 14 पुस्तकों का लोकार्पण किया गया, जिनमें प्रमुख हैं—
डॉ. शिवमोहन सिंह की “सर्जना के विविध आयाम”,
डॉ. मृदुल तिवारी ‘महक’ का ग़ज़ल संग्रह “ख्वाहिशें”,
किरण तिवारी का उपन्यास “अन्तर्द्वन्द”,
डॉ. पुष्पांजलि अग्रवाल की “श्वासों का सफ़र”,
डॉ. विभा प्रकाश की “सीप में सागर”,
सौम्या मिश्रा ‘अनुश्री’ की “टुकड़ा-टुकड़ा जीवन”,
डॉ. रामकृष्ण वी. सहस्रबुद्धे की “प्यार के धागे”,
डॉ. मुकुंद नीलकंठ जोशी की “सवैया कवित्त”, “वर्ड रामायण” एवं “अपनी सबकी मौज”,
तथा डॉ. छगनलाल गर्ग की “छगन दोहावली विविधा” शामिल रहीं।
इस सत्र का कुशल संचालन देहरादून के सुकवि पवन शर्मा ने किया।
दूसरे दिन सम्मान समारोह और कवि सम्मेलन
दूसरे दिन के प्रथम सत्र की मुख्य अतिथि डॉ. विद्या सिंह तथा अध्यक्ष डॉ. मुकुंद नीलकंठ जोशी रहे। द्वितीय सत्र सम्मान समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. रामकृष्ण वी. सहस्रबुद्धे ने की तथा संचालन सौम्या मिश्रा ‘अनुश्री’ एवं अर्चना झा ने किया।
अंतिम सत्र कवि सम्मेलन का रहा, जिसकी अध्यक्षता डॉ. इंदु अग्रवाल ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में बीकानेर से आए प्रख्यात कवि-शायर श्री रवि शुक्ल उपस्थित रहे। कवि सम्मेलन का सफल संचालन पवन शर्मा ने किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर महासचिव सौम्या मिश्रा ने सभी अतिथियों एवं सहभागियों का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ दो दिवसीय साहित्यिक अधिवेशन गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ।

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