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औद्योगिक क्षेत्रों में हरित पट्टी मानकों के संशोधन पर सांसद डॉ. नरेश बंसल का सवाल, सरकार ने दिए विस्तृत जवाब

नई दिल्ली 12 दिसंबर। भाजपा राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने आज सदन में औद्योगिक क्षेत्रों के लिए हरित पट्टी (Green Belt) मानकों के संशोधन से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्यावरण संबंधी प्रश्न उठाया। उन्होंने यह प्रश्न पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री कीर्तिवर्धन सिंह से नियमों के तहत किया।

सांसद बंसल ने अपने प्रश्न में पूछा कि—
क) पर्यावरण मंजूरी ढांचे के तहत नए औद्योगिक क्षेत्रों, पार्कों और परियोजनाओं के लिए अधिसूचित संशोधित हरित पट्टी/वृक्षारोपण मानकों का ब्यौरा क्या है?
ख) पूर्व में निर्धारित 33 प्रतिशत हरित आवरण को संशोधित करने का तर्क क्या है?
ग) क्या सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है कि संशोधित मानक सतत औद्योगिक विकास को बढ़ावा दें?
घ) यदि हां, तो उससे संबंधित विवरण क्या है?

सरकार द्वारा दिया गया विस्तृत उत्तर
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री कीर्तिवर्धन सिंह ने बताया कि—

(क) मंत्रालय ने 29 अक्टूबर 2025 के कार्यालय ज्ञापन द्वारा हरित पट्टी मानकों को संशोधित कर अनिवार्य अनुपालन हेतु निर्देश जारी किए हैं।

संशोधित मानक के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्रों में कम से कम 10% क्षेत्र को सामान्य हरित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया जाना आवश्यक है।

लाल श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों को अपने परिसर का 15% और नारंगी श्रेणी की इकाइयों को 10% हिस्सा हरित पट्टी के रूप में विकसित करना अनिवार्य है।

औद्योगिक क्षेत्रों के बाहर लाल और नारंगी श्रेणी की इकाइयों को क्रमशः 25% और 20% हरित पट्टी विकसित करनी होगी।

गैर-वायु प्रदूषणकारी इकाइयों के लिए इसमें 5% तक की छूट प्रदान की जा सकती है।

हरित और श्वेत श्रेणी की इकाइयों के लिए हरित पट्टी विकसित करना वैकल्पिक रखा गया है, सिवाय उन हरित उद्योगों के जिनका वायु प्रदूषण स्कोर 25 है, उन्हें 10% हरित आवरण अनिवार्य रूप से विकसित करना होगा।

(ख से घ) मंत्री ने स्पष्ट किया कि भूमि उपयोग की व्यावहारिकता, पर्यावरणीय आवश्यकताओं और ईआईए अधिसूचना 2006 की शर्तों में संतुलन बनाने के लिए संशोधन आवश्यक था।
संशोधित मानक एक विशेषज्ञ समिति द्वारा वैज्ञानिक परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर तैयार किए गए हैं।
मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि—

प्रदूषण क्षमता वाले लाल और नारंगी श्रेणी के उद्योग अधिक हरित आवरण विकसित करें,

औद्योगिक कार्यकलापों से उत्पन्न प्रदूषण में कमी आए,

तथा सतत औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिले।

सरकार ने स्पष्ट किया कि नए मानक प्रदूषण की संभाव्यता के आधार पर युक्तिसंगत और वैज्ञानिक रूप से तैयार किए गए हैं, जिससे उपलब्ध भूमि का इष्टतम उपयोग भी सुनिश्चित हो सके।

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