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जड़ी-बूटी उत्तराखण्ड की यूएसपी, आर्थिकी से जोड़े जाने पर दिया जाए विशेष जोर: मुख्य सचिव

देहरादून, 24 दिसम्बर। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में वन विभाग की “गैर-प्रकाष्ठ वन उपज का विकास तथा हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म परियोजना” के अंतर्गत राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य सचिव ने परियोजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए वन विभाग को शीघ्र परियोजना प्रबंधन परामर्शदाता (पीएमसी) गठित किए जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि जड़ी-बूटी उत्तराखण्ड की यूएसपी है और इसे प्रदेश की आर्थिकी से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कृषि, उद्यान एवं वन विभाग को आपसी समन्वय से जड़ी-बूटी के उत्पादन, प्रसंस्करण एवं मार्केटिंग को लेकर समग्र कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में बजट प्रक्रिया चल रही है, आवश्यकता पड़ने पर इसके लिए बजटीय प्रावधान भी किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने हर्बल नर्सरियों को हर्बल एवं एरोमा पार्क के रूप में विकसित कर उन्हें पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने देवबंद, खिर्सू, जागेश्वर, सेलाकुईं, मुनस्यारी आदि स्थानों में नर्सरियों का विस्तार कर हर्बल-एरोमा पार्क के रूप में विकसित करने हेतु तत्काल कार्यवाही शुरू करने तथा शीघ्र एक समग्र नर्सरी प्लान तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने जड़ी-बूटी विकास के लिए एक कोर ग्रुप के गठन के भी निर्देश दिए, जिसमें कृषि, उद्यान, हर्बल विकास एवं अनुसंधान संस्थान, सगन्ध पौधा केन्द्र, वन विभाग एवं वन निगम को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ये सभी संस्थान अलग-अलग कार्य कर रहे हैं, जिन्हें अब बेहतर परिणामों के लिए आपसी समन्वय से कार्य करना होगा।
मुख्य सचिव ने बताया कि गैर-प्रकाष्ठ वन उपज विकास तथा हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म परियोजना के अंतर्गत 10 हजार किसानों को प्रशिक्षण दिया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए शीघ्र प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने तथा सगन्ध पौधा केन्द्र को प्रशिक्षण के लिए नोडल एजेंसी के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला स्तरीय अनुश्रवण समितियों के गठन और नियमित समीक्षा बैठकों के आयोजन पर भी जोर दिया। साथ ही कहा कि जड़ी-बूटी उत्पादन के साथ-साथ मार्केटिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा आयुर्वेदिक फार्मा कम्पनियों एवं मांगकर्ताओं की आवश्यकता के अनुरूप उत्पादन को प्राथमिकता दी जाए।
बैठक में प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, पीसीसीएफ (हॉफ) श्री रंजन कुमार मिश्र, पीसीसीएफ (वन पंचायत) श्री वी.पी. गुप्ता, अपर सचिव श्री विजय कुमार जोगदण्डे, श्री हिमांशु खुराना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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