राज्य आंदोलनकारियों की घोषणाओं पर शासनादेश न जारी होने से आक्रोश, 30 दिसंबर को धरना और 16 जनवरी को सचिवालय घेराव का ऐलान

देहरादून, 21 दिसंबर। राजधानी स्थित कचहरी परिसर के शहीद स्मारक पर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य स्थापना दिवस के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य आंदोलनकारियों के हित में की गई विभिन्न घोषणाओं पर अब तक शासनादेश जारी न होने को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया। आंदोलनकारियों ने इस लापरवाही के लिए शासन और सचिवालय दोनों के प्रति नाराजगी जताई।
बैठक की अध्यक्षता श्रीमती सत्या पोखरियाल ने की, जबकि संचालन पूर्ण सिंह लिंगवाल द्वारा किया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने कहा कि रजत वर्ष के अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा आंदोलनकारियों की पेंशन वृद्धि, विकलांग आंदोलनकारियों की पेंशन में बढ़ोतरी, अटेंडेंट की व्यवस्था तथा चिन्हीकरण की तिथि छह माह बढ़ाए जाने सहित कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई थीं, लेकिन डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी इनका शासनादेश जारी न होना सचिवालय के अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इतने समय बाद भी मामला लटका रहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
अध्यक्षता कर रहीं सत्या पोखरियाल ने कहा कि राज्य आंदोलन में शामिल रहे सभी आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण किया जाना चाहिए। अब ऐसे आंदोलनकारियों की संख्या बहुत सीमित रह गई है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2010 में जिला स्तर पर गठित चिन्हीकरण समितियों द्वारा चयनित नामों को आंदोलनकारी के रूप में मान्यता देने का निर्णय लिया गया था।
प्रदेश महासचिव रामलाल खंडूरी ने कहा कि प्रवर समिति, मंत्री समिति और विधानसभा से सर्वसम्मति से पारित कानून के तहत सभी चिन्हित आंदोलनकारियों के आश्रितों को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिए जाने का प्रावधान किया गया था, लेकिन शासन स्तर पर अधिकारियों ने नौकरीपेशा आंदोलनकारियों के आश्रितों को इससे वंचित करने का आदेश जारी कर दिया, जो मूल अधिनियम का उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी अपने को विधानसभा से भी बड़ा समझने लगे हैं और मुख्यमंत्री की घोषणाओं को भी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
बैठक में प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों के आतंक से मुक्ति दिलाने की मांग उठाई। पुष्पलता सिलमाना और द्वारिका बिष्ट ने आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट देने की मांग करते हुए आगामी धरना-प्रदर्शन और घेराव कार्यक्रमों में मातृशक्ति से बढ़-चढ़कर भागीदारी का आह्वान किया। साथ ही आंदोलनकारी चिन्हीकरण में पांचवां मानक शामिल कर शीघ्र शासनादेश जारी करने की मांग भी की गई।
बैठक के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि शासनादेशों में हो रही लापरवाही के विरोध में प्रथम चरण में 30 दिसंबर को दीनदयाल पार्क में धरना दिया जाएगा। यदि इसके बाद भी सुधार नहीं हुआ तो आगामी 16 जनवरी 2026 को सचिवालय का घेराव किया जाएगा।
इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन नेगी, प्रदेश महासचिव रामलाल खंडूरी, प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती, केशव उनियाल, पुष्पलता सिलमाना, द्वारिका बिष्ट, अरुणा थपलियाल, राधा तिवारी, संचालक पूर्ण सिंह लिंगवाल, धर्मपाल सिंह रावत, हरी मेहर, गणेश डंगवाल, राकेश चंद्र कांडपाल, विनोद नौटियाल, संगीता रावत, सावी नेगी, आशा नौटियाल, विक्रम सिंह राणा, यशोदा ममगाई, सुनील नारायण शर्मा, रामेश्वरी नेगी, प्रभात डंडरियाल, विनोद असवाल, निधि भट्ट, दुर्गा बहादुर छेत्री, सुधीर नारायण शर्मा, दीपेश प्रसाद सेमवाल सहित बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी उपस्थित रहे।

