कांग्रेस को गांधी नहीं, राम का नाम योजना में आने से दिक्कत है : भट्ट
विकसित भारत -जी राम जी योजना, विकसित भारत 2047 लक्ष्य प्राप्ति में मील का पत्थर

*इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी में जबरदस्त सुधार के बाद योजना को नए और डिजिटली स्वरूप में लाना आवश्यक!देहरादून 17 दिसंबर। भाजपा ने विकसित भारत जी राम जी योजना को पीएम द्वारा निर्धारित 2047 के लक्ष्य प्राप्ति में मील का पत्थर साबित होने वाला कदम बताया है। प्रदेशाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट ने कहा, ग्रामीण क्षेत्रों के इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में जबरदस्त सुधार हुआ है, अब रोजगार गारंटी योजना को पूर्णतया डिजिटली और नए स्वरूप में लाना आवश्यक था। वहीं विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, पीएम मोदी, गांधी जी के सिद्धांतों को धरातल पर उतारते हैं और कांग्रेस को राम के नाम से ही नफरत है। वे नकारत्मक राजनीति के तहत इन सुधारों पर झूठ परोस रहे हैं, उत्तराखंड को मिलता रहेगा 90 फीसदी अनुदान।
संसद में पेश विकसित भारत गारंटी का रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण योजना पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने इसे भारत की तस्वीर बदलने वाला बताया है। योजना का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा, लगातार प्रयासों से विगत कुछ वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में अवस्थापना और संचार सुविधाओं में क्रांतिकारी सुधार हुआ है। लिहाजा अब सही समय है रोजगार योजना को नए स्वरूप में सामने लाने का ताकि 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। इस सुधार के तहत योजना के दायरे में मुख्यत जल संसाधनों का संचय, ग्रामीण अवस्थापना, प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा और आजीविका से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता दी गई हैं। चूंकि डिजिटलीकरण में आज हम दुनिया में नंबर वन है लिहाजा इस योजना को भी पीएम गति शक्ति से जोड़कर अधिक व्यावहारिक और भ्रष्टाचार प्रूफ बनाने की कोशिश की गई है। वही विकास योजनाओं को लेकर ग्राम पंचायत में आपसी एवं सरकारी विभागों से समन्वय बनने पर भी जोड़ दिया गया है। नई टेक्नोलॉजी के प्रयोग से कार्यों में तेजी और पारदर्शिता आएगी। वहीं कार्यों के साप्ताहिक मूल्यांकन और बायोमेट्रिक प्रयोग होने से भुगतान की स्थिति में बहुत सुधार होना तय है।
उन्होंने विपक्ष की आलोचना को दरकिनार करते हुए कहा, अब पूर्ववर्ती 100 के बजाय 125 दिन रोजगार गारंटी से प्राप्त होगा, जिसके लिए बजट बढ़ाकर, लगभग 1.5 लाख करोड़ किया गया । केंद्र ने राज्यों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए 60: 40 का अनुपात तय किया है। हालांकि उत्तराखंड जैसे हिमालय राज्यों के लिए पहले की तरह यह हिस्सेदारी 90:10 ही रहने वाली है। उन्होंने आईना दिखाते हुए कहा कांग्रेस सरकारों के समय इस योजना का बजट कभी भी 30 हजार करोड़ से अधिक नहीं रहा है, वहीं अब 70 हजार करोड़ से अधिक की राशि इसमें दी जा रही है। वहीं नई योजना में 60 फीसदी हिस्सेदारी के चलते यह राशि एक लाख करोड़ से अधिक हो जाएगा। लिहाजा ग्रामीणों को पहले से बहुत अधिक राशि, विकास कार्यों के लिए केंद्र से प्राप्त होगी। ऐसे में राज्यों को भी शेष जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए ग्रामीण विकास में भागेदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। इससे पूर्व केंद्र द्वारा कराए सर्वे में 23 राज्यों, विशेषकर बंगाल में इस योजना को लेकर उदासीनता एवं अनियमिताएं बड़े पैमाने पर पाई गई थी।
उन्होंने बताया कि इसमें फसल के पीक सीजन में 60 दिन को रोजगार गारंटी से अलग रखा गया है, जिसे राज्य अपने राज्य के अनुकूल व्यवस्थित करेंगे। इस छूट के पीछे उद्देश्य है ग्रामीण क्षेत्र में कृषि को लेकर श्रम उपलब्धता सुनिश्चित करवाना ताकि वर्षभर में रोजगार की संख्या में बढ़ोत्तरी हो।
वही उन्होंने नाम परिवर्तन को लेकर लगाए विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, अब तक किसी सरकार या प्रधानमंत्री जिसने महात्मा गांधी जी के जीवन शैली और सिद्धांतों को आत्मसर किया है वो एनडीए सरकार और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी हैं। चाहे गांधी जी की जीवन शैली को आगे बढ़ाना हो, खादी को बढ़ावा देना हो, ग्राम स्वराज की अवधारणा को इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करके धरातल पर उतारना हो या स्वदेशी आग्रह के अभियान को निर्णायक मोड़ पर ले जाना हो। यदि सिर्फ नाम परिवर्तन की बात की जाए तो पूर्व में भी इसी योजना का नाम जवाहरलाल नेहरू से बदला गया, फिर बाद में मनरेगा के नाम से लाया गया। क्या इसे माना जाए कि कांग्रेस को नेहरू जी के नाम से दिक्कत थी। वहीं उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सच यह है कांग्रेस को प्रभु श्री राम के नाम से ही दिक्कत है, जो योजना की व्यापकता के चलते स्वत: इसमें शामिल हो गया है। जबकि गांधी जी तो राम राज स्थापित करना चाहते थे, रघुपति राजा राम भजन का गुणगान करते थे और उनकी समाधि पर भी हे राम लिखा गया। लिहाजा इस योजना के अन्य स्वरूप में आने के बाद नाम नहीं, काम नहीं करने पर आपत्ति होना तय है।
