उत्तराखण्डराजनीति

केंद्र,सहकारी बैंकों की वित्तीय हालात में सुधार हेतु कर रही है विशेष प्रयास

देहरादून 17 दिसंबर। केंद्र सरकार 63 कमजोर वित्तीय स्थिति वाले सहकारी बैंकों की माली हालत में सुधार के लिए विशेष प्रयास कर रही है। जिसमें नई शाखाएं खोलने की अनुमति, उधार लक्ष्य में कमी और बकाया ऋणों का एकमुश्त भुगतान प्रमुख उपायों में शामिल हैं।

प्रदेशाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट सदन में देश में खराब माली हालत वाले सहकारी बैंक को लेकर केंद्र की योजना संबंधित सवाल पूछे थे। जिसका ज़बाब में वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी की तरफ से बताया गया कि भारतीय रिजर्व बैंक आरबीआई एवं राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा दी गई सूचना के अनुसार, कुल 47 शहरी सहकारी बैंक और 16 ग्रामीण सहकारी बैंक जिसमें 1 राज्य सहकारी बैंक और 15 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक दबाव में हैं। सरकार ने सहकारी बैंकों को सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न पहलें की हैं। जिसके अनुसार,
शहरी सहकारी बैंकों को अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए नई शाखाएं खोलने की अनुमति दी गई है। वहीं प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र को उधार यानि पीएसएल लक्ष्य को 75% से घटाकर 60% करके, शहरी सहकारी बैंकों के लिए राहत दी गई है। राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त और विकास निगम लिमिटेड, जो एक गैर-जमा लेने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी है, को सूचना प्रौद्योगिकी बुनियादी ढांचा और परिचालन संबंधी सहायता प्रदान करने के लिए शहरी सहकारी बैंकों के लिए एक व्यापक संगठन के रूप में स्थापित किया गया है।

इसी तरह सहकारी बैंकों को वाणिज्यिक बैंकों की तरह बकाया ऋणों का एकमुश्त निपटान करने की अनुमति भी दी गई है।
वहीं पारदर्शिता सुनिश्चित करने और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए सरकार द्वारा बैंककारी विनियमन अधिनियम में भी संशोधन किया गया है ताकि सहकारी बैंकों के निदेशक मंडल जिसमें अध्यक्ष और पूर्णकालिक निदेशकों को छोड़कर शेष का कार्यकाल अधिकतम 10 वर्ष किया जा सके।

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