भाजपा ने सभी सातों मोर्चों की प्रदेश टीम को दिया अंतिम रूप, शीघ्र होगी घोषणा
जनवरी मध्य तक जिले एवं मंडल स्तर पर हो जाएगा भाजपा में मोर्चों का गठन
*सरकार कर रही है कुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं हेतु व्यवस्था, सनातन विरोधी कांग्रेस को चिंता की जरूरत नहीं: भट्ट*
*वंदेमातरम, राष्ट्रीयता की अलख जगाने वाला गीत, प्रत्येक देशवासी को गाना चाहिए: भट्ट*
देहरादून 29 नवंबर। भाजपा प्रदेश नेतृत्व द्वारा संगठन के सभी सातों मोर्चों की राज्य टीम को अंतिम रूप दिया गया है। वहीं जनवरी मध्य तक जिले एवं मंडल स्तर पर मोर्चा टीम गठन भी कर लिया जाएगा। इसकी जानकारी देते हुए प्रदेशाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट ने कुंभ के नामांकरण को लेकर उठाए जा रहे विवाद को भी बेबुनियादी बताते हुए कहा, सनातन विरोधी कांग्रेस को चिंता करने की जरूरत नहीं है।
प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री मनवीर चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि पार्टी मुख्यालय में संगठन विस्तार को प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में महत्वपूर्ण बैठक हुई है। जिसमें प्रदेश महामंत्री संगठन श्री अजेय कुमार, प्रदेश महामंत्री श्री कुंदन परिहार, श्रीमती दीप्ति रावत, श्री तरुण बंसल प्रमुख रूप में शामिल हुए। बैठक में सभी 7 मोर्चों के प्रभारी और प्रदेश अध्यक्षों से बातचीत कर उनकी प्रदेश टीम और जिलाध्यक्षों की सूची को अंतिम रूप दिया गया है।
बैठक के उपरांत पत्रकारों के सवालों का ज़बाब देते हुए प्रदेशाध्यक्ष श्री भट्ट ने जानकारी दी कि सभी मोर्चों की टीमों पर विचार पूर्ण हो गया है और एक दो दिन में घोषणा कर दी जायेगीं। वहीं उन्होंने स्पष्ट किया कि 15 जनवरी तक पार्टी, जिला एवं मंडल स्तर पर भी टीमों का गठन हर हालत में कर लिया जाएगा।
इस मौके पर उन्होंने, विपक्ष द्वारा कुंभ, अर्धकुंभ नाम को लेकर की जा रही बयानबाजी को निरर्थक एवं बेबुनियादी बताया। उन्होंने कहा, सनातन संस्कृति का यह सबसे बड़ा समागम, चाहे 6 वर्ष में हो या 12 वर्ष में, इसे कुंभ ही कहा जाता है। लिहाजा नाम की शब्दावली में किसी को नहीं पढ़ना चाहिए। हमारी सरकार इस बार के हरिद्वार कुंभ की व्यवस्था को 12 वर्ष के कुंभ के आधार पर कर रही है। हमारी कोशिश है कि उम्मीदानुशार करोड़ों श्रृद्धालु इस अवसर पर पहुंचेंगे, उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत न हो। वहीं उन्होंने कांग्रेस नेताओं द्वारा की जा रही आपत्ति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि सनातन विरोधी पार्टी को इस मुद्दे पर अनावश्यक चिंता करने की जरूरत नहीं है।
वहीं कुछ पार्टी नेताओं द्वारा वंदे मातरम गायन के विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा, संविधान में उल्लेखित इस गीत को गाकर ही हमने आजादी पाई है और आज भी हर आंदोलन की अलख इसी से जगती है। ऐसे में कोई इसका विरोध कैसे कर सकता है, इसके विरोध से उसकी राष्ट्रीयता पर ही प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है, भारत माता की वंदना प्रत्येक देशवासी को करनी चाहिएं ।
