बुजुर्ग ही नहीं, बच्चों में भी दिख रहा काला मोतिया, दून मेडिकल कालेज चिकित्सालय में जागरुकता गोष्ठी

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देहरादून 13 मार्च। विश्व ग्लूकोमा (काला मोतिया) सप्ताह के तहत दून मेडिकल कालेज चिकित्सालय में पिछले दो दिन में 400 रोगियों की जांच की गई। जिसमें 30 मरीजों की आंखों में काला मोतिया के लक्षण मिले हैं। इनकी अब आवश्यक जांच और जरूरत पड़ने पर उपचार शुरू किया जाएगा। चिकित्सकों का कहना हे कि आंखों की सुरक्षा के लिए लोग को सावधानी बरतनी चाहिए। कहा कि काला मोतिया अब बुजुर्ग ही नहीं, बच्चों में भी देखने को मिल रहा है।

काला मोतिया को लेकर लोग में जागरूकता लाने के लिए अस्पताल की आई ओपीडी में एक जागरुकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी शुरुआत प्राचार्य डा. आशुतोष सयाना ने की। उन्होंने कहा कि काला मोतिया से होने वाली अंधता को रोका जा सकता है। इसके लिए 40 साल से ऊपर के सभी लोग की नियमित जांच पर जोर देने की जरूरत है। नेत्र रोग के विभागाध्यक्ष डा. यूसुफ रिजवी ने कहा कि काला मोतिया का इलाज सफल तरीके से हो सकता है। यदि समय पर चिकित्सीय सहायता ली जाए और पूरा इलाज कराया जाए। जन जागरुकता से हम ग्लूकोमा के कारण होने वाली अंधता को कम कर सकते हैं। एसोसिएट प्रोफेसर डा. सुशील ओझा ने कहा कि काला मोतिया पिछले कुछ दशकों में बुजुर्गों में ही नहीं बच्चों में भी देखने को मिल रहा है। बच्चों में यह अनुवांशिक रूप से उभर कर सामने आ रहा है। उच्च जोखिम वाले लोग और मधुमेह व उच्च रक्तचाप वाले रोगियों को ग्लूकोमा की जांच कराने की सलाह दी। कहा कि अगर इसका जल्द पता चल जाए तो इसे रोका जा सकता है। इस दौरान चिकित्सा अधीक्षक डा. अनुराग अग्रवाल, असिस्टेंट प्रोफेसर डा. नीरज सारस्वत, डा. दुष्यंत उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।