कैबिनेट में लोक तथा निजी संपत्ति अध्यादेश 2024 पर लगी मुहर

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कैबिनेट की बैठक में आठ फैंसलों पर मोहर

देहरादून 04 मार्च। धरना प्रदर्शन और आंदोलन तथा दंगों के दौरान सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों से ही नुकसान की वसूली की जाएगी। उत्तराखंड सरकार ने अब इसका पुख्ता बंदोबस्त कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता वाली आज सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में सरकार द्वारा इस आशय के अध्यादेश को अपनी मंजूरी दे दी गई है।
आज हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में उत्तराखंड लोक एवं निजी संपत्ति अध्यादेश 2024 को मंजूरी प्रदान कर दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन आंदोलनों या फिर दंगों तथा उपद्रव के दौरान सरकारी व निजी संपत्ति को अगर नुकसान पहुंचाया जाता है तो इसकी वसूली दंगाइयों से ही की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए एक ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा जो संपत्तियों को हुई क्षति व आर्थिक नुकसान का आकलन करेगा। जिसके अनुसार क्षति की वसूली कर सरकार या जिसका नुकसान हुआ है उसे दी जाएगी।
सरकार द्वारा इस अध्यादेश को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल के हस्ताक्षर होते ही यह अध्यादेश लागू हो जाएगा। तथा सरकार को इसे 6 महीने के अंदर राज्य विधानसभा से भी पारित कराया जाएगा। हल्द्वानी हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री धामी ने यह घोषणा की थी कि इसमें जो भी संपत्तियों को नुकसान हुआ है उसकी वसूली दंगाइयों से ही की जाएगी। जो इस अध्यादेश के आने से सुनिश्चित हो गया है।
आज लाये गये इस अध्यादेश का भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेताओं द्वारा समर्थन किया गया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भटृ का कहना है कि यह बहुत पहले हो जाना चाहिए था सरकार ने इस तरह की व्यवस्था करके अच्छा काम किया है। तोड़फोड़ और आगजनी करने वाले अराजक तत्वों पर लगाम कसा जाना जरूरी है। उधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा का कहना है कि हम इस फैसले का स्वागत करते हैं क्योंकि सरकारी संपत्तियों को जनता के पैसे से ही बनाया जाता है। सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने का अधिकार किसी को भी नहीं हो सकता।
आज की कैबिनेट में लिए गए आठ फैंसलों में भारत सरकार द्वारा संचालित अनुसूचित जाति दशमोत्तर छात्रवृत्ति की राशि बढ़ाने तथा लेखाकारों के अधीनस्थ को लेकर भी अहम फैसले किए गए हैं वित्त विभाग के अधीनस्थ लेखा संवर्ग के कर्मचारियों का अधिकार वित्त विभाग के अधीन ही रहेगा तथा एनआईटी सुमड़ी को निशुल्क जमीन उपलब्ध कराने का फैसला भी लिया गया है।