उत्तराखण्डसहित्य

उद्गार साहित्यिक एवं सामाजिक मंच ने मनाया अध्यक्ष शिवमोहन सिंह का जन्मदिवस, काव्य संगोष्ठी में बही साहित्य की सरिता

देहरादून, 15 जून। उद्गार साहित्यिक एवं सामाजिक मंच के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्री शिवमोहन सिंह के जन्मदिवस के अवसर पर उनके कृष्ण नगर एक्सटेंशन स्थित आवास पर भव्य काव्य संगोष्ठी एवं जन्मोत्सव समारोह का आयोजन किया गया। साहित्यिक सौहार्द, काव्य रस और आत्मीय शुभकामनाओं से ओतप्रोत इस आयोजन में देहरादून के अनेक वरिष्ठ कवि, कवयित्रियां एवं साहित्यकार उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि उद्गार साहित्यिक एवं सामाजिक मंच विगत 32 वर्षों से विकासनगर एवं देहरादून क्षेत्र में साहित्यिक एवं सामाजिक गतिविधियों का सक्रिय संचालन करता आ रहा है। मंच की इस सतत यात्रा में अध्यक्ष शिवमोहन सिंह के प्रेरणादायी नेतृत्व और साहित्य के प्रति समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदना के साथ हुआ। कवयित्री नीरू गुप्ता ‘मोहिनी’ ने मधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके पश्चात आयोजित काव्य गोष्ठी में उपस्थित कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया तथा जन्मदिवस की शुभकामनाएं अर्पित कीं।
समारोह में संस्कृत एवं हिन्दी की विदुषी डॉ. सुधा रानी पांडे तथा पूर्व कुलपति एवं नवगीत पुरोधा असीम शुक्ल का विशेष सान्निध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता असीम शुक्ल ने की, जबकि मंच का सफल संचालन उद्गार के सचिव पवन शर्मा ने किया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में असीम शुक्ल ने सभी रचनाकारों के काव्य पाठ की सराहना करते हुए उनकी रचनाओं के गुण-दोषों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देहरादून के साहित्यिक समाज में शिवमोहन सिंह को ‘गीतों का राजकुमार’ कहा जाना पूर्णतः सार्थक है। उनके गीत आज भी श्रोताओं के मन को उसी प्रकार स्पर्श करते हैं, जैसे वर्षों पूर्व किया करते थे।
इस अवसर पर निर्मला सिंह, रजनीश त्रिवेदी, अंबर खरबंदा, इकबाल ‘आजर’, डॉली डबराल, डॉ. भारती मिश्रा, हरीश रवि, सत्यप्रकाश ‘सत्य’, डॉ. मुनिराम सकलानी ‘मुनीन्द्र’, स्वाति मौलश्री, डॉ. विद्युत प्रभा चतुर्वेदी ‘मंजू’, शोभा पराशर, श्रीकांत ‘श्री’, महिमा ‘श्री’, डॉ. विद्या सिंह, कविता बिष्ट ‘नेह’, मणि अग्रवाल ‘मणिका’, हेमवती नंदन कुकरेती, डॉ. नीता कुकरेती, शादाब अली मशहदी, डॉ. राकेश बलूनी, उषा झा, डॉ. शम्भू कुमार झा, आनंद सिंह ‘आनंद’, संजय प्रधान तथा पवन कुमार सूरज सहित अनेक साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
अंत में असीम शुक्ल के आशीर्वचन तथा राष्ट्रगान के साथ काव्य संगोष्ठी का समापन हुआ। यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और आत्मीय संबंधों का सुंदर संगम बनकर उपस्थित जनों के लिए अविस्मरणीय बन गया।

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